क्या है वाटर फास्टिंग, सच में तेजी से करता है वजन कम करने में है फायदेमंद


उपवास करने का चलन आजकल बहुत बढ़ चुका है. वजन घटाने के लिए यह एक प्रमुख तरीका बन चुका है. इसके पीछे विज्ञान भी है और कई अध्ययन इसे समर्थन भी करते हैं ,लेकिन सीमित समय (1-2 दिन) के लिए किया गया फास्टिंग आमतौर पर सही माना जाता है .

उपवास करने का चलन आजकल बहुत बढ़ चुका है. वजन घटाने के लिए यह एक प्रमुख तरीका बन चुका है. इसके पीछे विज्ञान भी है और कई अध्ययन इसे समर्थन भी करते हैं ,लेकिन सीमित समय (1-2 दिन) के लिए किया गया फास्टिंग आमतौर पर सही माना जाता है .

लंबे समय तक फास्टिंग से शरीर में पोषक तत्वों की कमी और शरीर को नुकसान हो सकता है. फास्टिंग से ब्लड शुगर लेवल, बीपी और कोलेस्ट्रॉल लेवल प्रभावित हो सकते हैं. फास्टिंग करते समय पर्याप्त पानी पीना ज़रूरी है इससे डिहाइड्रेशन नहीं होगा.

लंबे समय तक फास्टिंग से शरीर में पोषक तत्वों की कमी और शरीर को नुकसान हो सकता है. फास्टिंग से ब्लड शुगर लेवल, बीपी और कोलेस्ट्रॉल लेवल प्रभावित हो सकते हैं. फास्टिंग करते समय पर्याप्त पानी पीना ज़रूरी है इससे डिहाइड्रेशन नहीं होगा.

कुछ शोधों से पता चला है कि लंबे समय तक फास्टिंग से शरीर का फैट प्रतिशत कम हो सकता है. लेकिन यह प्रभाव न्यूनतम है. जैसे ही खाना खाएंगे फिर आपका फैट बढ़ जाएगा. फास्टिंग से शरीर का कुल वज़न तो कम हो सकता है, लेकिन यह विशेष रूप से फैट को कम नहीं करता. फास्टिंग के साथ आपको नियमित व्यायाम और कैलोरी कंट्रोल ज़रूरी है, केवल फास्टिंग से काफी असर शरीर पर नहीं पड़ेगा ऐसा नहीं है. फास्टिंग से मेटाबॉलिज़्म तो बढ़ सकता है, लेकिन यह फैट लॉस करने का सही तरीका नहीं है.

कुछ शोधों से पता चला है कि लंबे समय तक फास्टिंग से शरीर का फैट प्रतिशत कम हो सकता है. लेकिन यह प्रभाव न्यूनतम है. जैसे ही खाना खाएंगे फिर आपका फैट बढ़ जाएगा. फास्टिंग से शरीर का कुल वज़न तो कम हो सकता है, लेकिन यह विशेष रूप से फैट को कम नहीं करता. फास्टिंग के साथ आपको नियमित व्यायाम और कैलोरी कंट्रोल ज़रूरी है, केवल फास्टिंग से काफी असर शरीर पर नहीं पड़ेगा ऐसा नहीं है. फास्टिंग से मेटाबॉलिज़्म तो बढ़ सकता है, लेकिन यह फैट लॉस करने का सही तरीका नहीं है.

शुरुआती समय में, उपवास से वजन तेजी से घट सकता है, लेकिन यह ज्यादातर पानी का वजन होता है. फास्टिंग के बाद, वजन घटाना स्थिर हो सकता है या पुनः बढ़ सकता है.आइए इसे समझते है जब हम खाना खाते हैं, तो ज्यादा ऊर्जा शरीर में ग्लाइकोजेन के रूप में जमा हो जाती है. यह ग्लाइकोजेन हमारे लिवर और मांसपेशियों में संग्रहीत होती है.

शुरुआती समय में, उपवास से वजन तेजी से घट सकता है, लेकिन यह ज्यादातर पानी का वजन होता है. फास्टिंग के बाद, वजन घटाना स्थिर हो सकता है या पुनः बढ़ सकता है.आइए इसे समझते है जब हम खाना खाते हैं, तो ज्यादा ऊर्जा शरीर में ग्लाइकोजेन के रूप में जमा हो जाती है. यह ग्लाइकोजेन हमारे लिवर और मांसपेशियों में संग्रहीत होती है.

जब आप उपवास करते हैं, शरीर पहले इस ग्लाइकोजेन को ऊर्जा के रूप में उपयोग करता है. जब ग्लाइकोजेन की स्टोर्स खत्म हो जाती हैं, तो शरीर फैट स्टोर्स को ऊर्जा के लिए उपयोग करना शुरू करता है. यही कारण है कि लंबे समय तक उपवास करने से वजन कम होता है. लेकिन यह तरीका सही नहीं माना जाता है.

जब आप उपवास करते हैं, शरीर पहले इस ग्लाइकोजेन को ऊर्जा के रूप में उपयोग करता है. जब ग्लाइकोजेन की स्टोर्स खत्म हो जाती हैं, तो शरीर फैट स्टोर्स को ऊर्जा के लिए उपयोग करना शुरू करता है. यही कारण है कि लंबे समय तक उपवास करने से वजन कम होता है. लेकिन यह तरीका सही नहीं माना जाता है.

शोधों के अनुसार लंबे समय तक फास्टिंग करने पर शरीर के फैट के प्रतिशत में थोड़ी कमी आ सकती है. फिर भी, फैट लॉस के लिए नियमित रूप से फास्टिंग के साथ व्यायाम और कैलोरी कंट्रोल करना करना जरूरी है.

शोधों के अनुसार लंबे समय तक फास्टिंग करने पर शरीर के फैट के प्रतिशत में थोड़ी कमी आ सकती है. फिर भी, फैट लॉस के लिए नियमित रूप से फास्टिंग के साथ व्यायाम और कैलोरी कंट्रोल करना करना जरूरी है.

Published at : 07 Mar 2024 03:14 PM (IST)

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