Indian diplomat अभय की कविताओं को थिएटर के कलाकारों ने जीवंत बनाया, ‘अर्थ एंथम’ का 150 भाषाओं में अनुवाद


समुद्र किनारे पर कविताओं का जादू

समुद्र
किनारे
पर
कविताओं
का
जादू

राजनयिक
अभय
की
पहचान
कवि
के
रूप
में
भी
है।
अपने
जादुई
शब्दों
से
कई
किताबों
को
आकार
दे
चुके
अभय
की
कविताओं
को
चेन्नई
के
एक
थिएटर
में
पेश
किया
गया।
दरअसल,
कविता
के
जादू
में
जब
संगीत
और
कलाकारों
की
प्रस्तुति
भी
जुड़
जाती
है,
तो
यह
अंत:करण
को
झंकृत
करने
वाली
रचना
बन
जाती
है।
समुद्र
किनारे
बसा
महानगर
चेन्नई
भी
कुछ
ऐसे
ही
लम्हों
का
गवाह
बना।

'थियेटर पोएट्री रीडिंग' की 25वीं वर्षगांठ

‘थियेटर
पोएट्री
रीडिंग’
की
25वीं
वर्षगांठ

चेन्नई
में
जब
राजनयिक
अभय
कुमार
की
लेखनी
से
निकले
शब्दों
को
पांच
थिएटर
आर्टिस्ट
ने
अपने
अंदाज
में
पेश
किया
तो
दर्शक
मंत्रमुग्ध
हुए
बिना
नहीं
रह
सके।
समाचार
एजेंसी
ANI
की
रिपोर्ट
के
मुताबिक
चेन्नई
के
तेयनमपेट
में
‘थियेटर
पोएट्री
रीडिंग’
की
25वीं
वर्षगांठ
मनाई
गई।
इसी
दौरान
अभय
कुमार
की
तीन
कविताओं
का
मंचन
हुआ।

तीन कविताओं को थिएटर में दिखाया

तीन
कविताओं
को
थिएटर
में
दिखाया

इस
आयोजन
के
दौरान
अभय
कुमार
की
नवीनतम
कविता
की
पुस्तकों
में
से
उनकी
कविताओं
का
चयन
किया
गया।
कविताओं
के
नाम-

  • लैटिन
    अमेरिका
    के
    अक्षर
    (The
    Alphabets
    of
    Latin
    America)
  • आवारा
    कविताएं
    (Stray
    Poems)
    और
  • मानसून
    (Monsoon)

मशहूर
थिएटर
कलाकारों

वी
बालकृष्णन,
थिएटर
निशा
के
संस्थापक,
मीरा
सीतारमन
और
शक्ति
रमानी
ने
तीनों
रचनाओं
को
जीवंत
कर
दिया।
अभय
कुमार
ने
खुद
भी
कहा
कि
कविताओं
को
भावपूर्ण
संगीत
और
कलाकारों
की
प्रस्तुति
के
साथ
देखकर
“सपना
देखने
जैसा”
महसूस
हुआ।
उन्होंने
उनकी
कविताओं
को
जीवंत
करने
और
उन्हें
एक
नया
आयाम
देने
के
लिए
कलाकारों
का
आभार
जताया।

 ब्राजील की साहित्य अकादमी में चुने गए

ब्राजील
की
साहित्य
अकादमी
में
चुने
गए

राजनयिक
अभय
की
कविताओं
के
चुनाव
और
थिएटर
में
कविता
पाठ
के
आयोजन
से
जुड़े
प्रकृति
फाउंडेशन
के
संस्थापक,
रणवीर
शाह
ने
अभय
के
कमाल
के
कवि
करार
दिया।
उन्होंने
कहा,
अभय
की
रचानाओं
ने
विश्व
स्तर
पर
प्रभाव
डाला
है।
विशेष
रूप
से
उनका
“अर्थ
एंथम”,
जिसका
दुनिया
की
150
से
अधिक
भाषाओं
में
अनुवाद
किया
जा
चुका
है।”
बता
दें
कि
हाल
ही
में
अभय
को
ब्राजील
के
साहित्य
अकादमी
के
एक
संबंधित
सदस्य
के
रूप
में
चुना
गया
है।

नीचे
पढ़ें
अभय
की
रचना
‘अर्थ
एंथम’—

कालिदास की रचनाओं का अंग्रेजी अनुवाद

कालिदास
की
रचनाओं
का
अंग्रेजी
अनुवाद

अभय
की
कविताओं
की
संगीबद्ध
प्रस्तुति
हुई
जिसमें
बांसुरी
पर
विक्रम
और
वायलिन
पर
किरण
कश्यप
के
संगीत
सुनने
वालों
के
दिलों
और
आत्मा
को
झकझोर
रहे
थे।
कमाल
की
संगीतमय
परफॉर्मेंस
के
बाद
खुद
कलमकार
और
राजनयिक
अभय
ने
कलाकारों
के
साथ
फोटो
भी
क्लिक
कराई।
कविता
से
जुड़े
राजनयिक
अभय
कालिदास
के
मेघदूत
और
ऋतुसंहार
का
संस्कृत
से
अंग्रेजी
भाषा
में
अनुवाद
कर
चुके
हैं।
उन्होंने
इसके
लिए
पोएट्री
बुक
ऑफ

ईयर
अवार्ड
(2020-21)
भी
जीता।

10 पंक्ति का एंथम 150 भाषाओं में अनुवाद

10
पंक्ति
का
एंथम
150
भाषाओं
में
अनुवाद

राजनयिक
अभय
के
साहित्य
प्रेम
का
अंदाजा
उनके
ट्विटर
टाइमलाइन
से
भी
लगाया
जा
सकता
है।
अफ्रीकी
देश
से
भारत
आने
के
बाद
जयपुर
लिटरेचर
फेस्टिवल
में
शरीक
हुए
अभय
ने
नोबेल
पुरस्कार
और
बुकर
प्राइज
हासिल
करने
वाले
रचनाकारों
के
साथ
फोटो
शेयर
की
हैं।
अर्थ
एंथम
की
रचना
के
बारे
में
अभय
बताते
हैं
कि
2008
में
इसकी
शुरुआत
हुई।
लंबी
अवधि
के
बाद
एक
ऐसी
कॉमन
रचना
तैयार
हुई
जो
पूरी
धरती
के
लिए
हो।
अप्रैल,
2022
तक
10
पंक्ति
के
अर्थ
एंथम
का
150
से
अधिक
भाषाओं
में
अनुवाद
किया
जा
चुका
है।

संस्कृत और पूर्वी अफ्रीकी देश की भाषा का कनेक्शन

संस्कृत
और
पूर्वी
अफ्रीकी
देश
की
भाषा
का
कनेक्शन

ऐसी
ही
एक
तस्वीर
में
कवि
अभय
कुमार
को
गीतकार
और
पटकथा
लेखन
में
संस्थान
का
दर्जा
पा
चुके
जावेद
अख्तर
और
गुलजार
के
साथ
भी
गौरवपूर्ण
लम्हे
शेयर
करते
देखा
गया।
उन्होंने
खुद
ट्विटर
पर
लिखा
कि
भारतीय
साहित्य
और
उर्दू
जगत
में
दोनों
मूर्धन्य
हस्तियां
हैं।
मॉनसून
के
बारे
में
एक
रिपोर्ट
में
लिखा
गया
कि
दुनिया
के
भूगोल
की
यात्रा
करती
यह
रचना
150
स्टैंजा
में
लिखी
गई
कमाल
की
अनुभूति
कराती
है।
अभय
के
साहित्य
से
जुड़ाव
का
एक
और
प्रमाण
संस्कृत
और
पूर्वी
अफ्रीकी
देश
मेडागास्कर
की
भाषा
Malagasy
का
रिलेशन
बताना
है।

अवॉर्ड विनर कलमकार हैं राजनयिक अभय

अवॉर्ड
विनर
कलमकार
हैं
राजनयिक
अभय

अभय
की
कामयाबी
की
कहानी
में
कई
और
भी
आयाम
हैं,
जिनमें
उनकी
रचना-
मॉनसून
और
बुक
ऑफ
बिहारी
लिटरेचर
बेहद
लोकप्रिय
हैं।
बिहारी…
को
कलिंगा
लिटरेरी
फेस्टिवल
में
अवॉर्ड
मिलेगा।
अभय
के
को
दक्षिण
एशियाई
कविता
में
उनके
योगदान
के
लिए
2013
में
SAARC
साहित्य
पुरस्कार
मिला।
लगभग
एक
दर्जन
कविता
संग्रहों
के
लेखक
अभय
आधा
दर्जन
से
अधिक
पुस्तकों
को
संपादित
भी
कर
चुके
हैं।



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