चिली में जंगल की आग घनी आबादी वाले इलाके में फैली, कम से कम 112 लोगों की मौत


सैंटियागो (चिली): चिली के जंगलों में लगी भीषण आग के घनी आबादी वाले इलाके में फैलने से पिछले तीन दिन में कम से कम 112 लोगों की मौत हो चुकी है. चिली के मध्य क्षेत्र के जंगल में दो दिन पहले लगी भीषण आग से रविवार को अग्निशमन विभाग के कर्मियों को काफी जूझना पड़ा. प्रशासन ने आग से गंभीर रूप से प्रभावित कई शहरों में कर्फ्यू लगा दिया है.

विना डेल मार शहर के आसपास आग सबसे अधिक तीव्रता से जल रही है, जहां 1931 में स्थापित एक प्रसिद्ध वनस्पति उद्यान रविवार को आग की लपटों में जलकर नष्ट हो गया. आग के कारण कम से कम 1,600 लोग बेघर हो गए हैं. विना डेल मार के पूर्वी क्षेत्र के कई इलाके आग की लपटों और धुएं से घिर गए हैं, जिससे कुछ लोग अपने घरों में फंस गए हैं.

अधिकारियों ने बताया कि विना डेल मार और आसपास के इलाके में करीब 200 लोगों के लापता होने की खबर है और आग की चपेट में आने से पिछले तीन दिन में कम से कम 112 लोगों की मौत हो चुकी है. करीब तीन लाख की आबादी वाला विना डेल मार शहर एक लोकप्रिय समुद्र तट रिसॉर्ट है और यहां दक्षिणी गोलार्द्ध में गर्मियों का मौसम आने पर एक प्रसिद्ध संगीत समारोह भी आयोजित होता है.

देश के राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि आग के कारण मृतक संख्या और बढ़ने की आशंका है, क्योंकि वालपराइसो क्षेत्र में चार स्थानों पर भीषण आग लगी है और दमकलकर्मियों को अत्यधिक खतरे वाले इलाकों तक पहुंचने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.

बोरिक ने चिलीवासियों से बचावकर्मियों के साथ सहयोग करने की अपील की. उन्होंने कहा, ‘‘यदि आपको इलाका खाली करने के लिए कहा जाता है तो ऐसा करने में संकोच न करें. आग तेजी से फैल रही है और जलवायु परिस्थितियों के कारण उस पर काबू पाना मुश्किल हो गया है. तापमान उच्च है, हवा तेज चल रही है और आर्द्रता कम है.’’ चिली की गृह मंत्री कैरोलिना तोहा ने शनिवार को बताया कि देश के मध्य और दक्षिण के 92 जंगल आग की चपेट में हैं, जहां इस सप्ताह तापमान असामान्य रूप से अधिक रहा है.

वालपराइसो क्षेत्र में सबसे भीषण आग लगने के कारण प्राधिकारियों ने लोगों से अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने का आग्रह किया. वालपराइसो क्षेत्र में तीन आश्रय शिविर बनाए गये हैं. तोहा ने बताया कि बचाव दल सबसे अधिक प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के लिए अब भी संघर्ष कर रहे हैं.

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