SIP क्या है, और कैसे निवेश करें? | What is SIP Investment in Hindi


SIP Kya Hai in Hindi

SIP Kya Hai : जो लोग म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में जानते है, उन्होंने SIP का नाम जरूर सुना होगा। लेकिन बहुत से लोगो को यह नहीं पता होता है, SIP क्या है (What is SIP in Hindi) आज हम इस लेख में सिप क्या होता है? इसी के बारे में जानने वाले है। SIP को सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान भी कहते है, इसके अंतर्गत आपको अपने पसंद के किसी भी Mutual Fund Scheme में हर महीने एक निश्चित राशि को जमा करना होता है।

कई लोग जब इन्वेस्टमेंट करना शुरू करते है, तो उनके सामने दो विकल्प होते है। एक Lump Sum अमाउंट और दूसरा SIP अमाउंट। इसके बाद वह गूगल में यह जानना चाहते है, की What is SIP Investment in Hindi सिप से किस तरह से इन्वेस्टमेंट किया जाता है। आज इस लेख में आपको सिप से जुड़ी सभी छोटी बड़ी जानकारियां मिलने वाली है। मुझे पूरी उम्मीद है, अगर आप इस लेख को ध्यानपूर्वक पढ़ लेते है, तो आपको किसी और लेख को पढ़ने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

पैसा बचाने के बहुत सारे तरीके होते है, उन्ही में से एक SIP Investment भी होता है। जिसकी मदद से आप लम्बे समय तक SIP द्वारा पैसे निवेश करके एक अच्छा रिटर्न कमा सकते है। यहाँ पर आपको बहुत सी ऐसी Scheme भी मिल जाती है, जहाँ पर आपको Tax में भी छूट मिल जाती है। आइये SIP क्या है, यह जानने से पहले यह जान लेते है, म्यूच्यूअल फण्ड क्या होता है – 

Mutual Fund क्या होता है?

म्यूचुअल फंड के अंतर्गत सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी ‘सिप’ क्या होता है, ये जानने से पहले म्यूचुअल फंड की आधारभूत समझ भी होनी जरूरी है। म्यूचुअल फंड का हिंदी में शाब्दिक अर्थ है – ‘पारस्परिक निधि।’ हालांकि सारे जगत में इसका अंग्रेजी नाम म्यूचुअल फंड ही प्रचलित है। म्यूचुअल फंड एक संगठित अथवा सामूहिक निवेश होता है, जिसमें निवेशकों के समूह मिलकर स्टॉक, प्रतिभूतियों और अन्य अल्पावधि वित्तीय योजनाओं में निवेश करते हैं।

म्यूचुअल फंड ऐसा फंड है जहां तमाम निवेशकों का पैसा पहले इकठ्ठा किया जाता है, और फिर उससे शेयर, बॉन्ड वगैरह में निवेश किया जाता है। म्यूचुअल फंड मैनेजमेंट संबंधी इन कामों को करने वाली कंपनी एएमसी यानी ‘एसेट मैनेजमेंट कंपनी’ कहलाती है। एक एसेट मैनेजमेंट कंपनी के पास कई सारे ‘म्यूचुअल फंड प्लान’ होते हैं। बता दें कि यूटीआई भारत की सबसे पुरानी म्यूचुअल फंड कंपनी यानी एएमसी है।

म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में सभी जानकारी विस्तार से जानने के लिए आप यह लेख पूरा पढ़ सकते है। जिसमे आपको बताया गया है, आपको किस म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट करना चाहिए, कौन सा म्यूच्यूअल फण्ड सबसे ज्यादा रिटर्न देता है, और भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां इस लेख में शामिल है : म्यूच्यूअल फण्ड क्या है

SIP क्या है (What is SIP in Hindi)

सिप या सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान एक तरह का ‘निवेश माध्यम’ है, निवेश का एक विकसित तरीका है, जिसमें निवेशक को म्यूचुअल फंड में एकमुश्त बड़ी रकम लगाने की बजाय समय-समय पर छोटी राशि निवेश करने की सहूलियत मिलती है। ये समयावधि साप्ताहिक, मासिक या त्रैमासिक कुछ भी हो सकती है।

ज़ाहिर है, सिप में एक निश्चित राशि समय-समय पर म्यूचुअल फंड के तहत निवेश करने की व्यवस्था होती है। और वर्तमान ‘नेट परिसंपत्ति मूल्य’ के मुताबिक निवेशक को यूनिट्स यानी इकाइयां आवंटित कर दी जाती हैं। सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के तहत निवेश करने पर हर बार आपके खाते में कुछ और इकाइयां जुड़ती जाती हैं।

सिप यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स के द्वारा एक अनुशासित बचत और निवेश को प्रोत्साहित किया जाता है। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स आमतौर पर काफी लचीले होते हैं, इसमें आप अपने निवेश की मात्रा को कभी भी बढ़ा/घटा सकते हैं, और उस योजना में निवेश रोक भी सकते हैं। सनद रहे कि सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान अथवा ‘एसआईपी’ यानी सिप वस्तुतः अपने आप में कोई निवेश नहीं बल्कि निवेश करने की एक विधि मात्र है।

जो म्यूचुअल फंड में निवेश करने का एक विकल्प है, एक प्लान है। जिसमें एक निश्चित अवधि पर, जैसे कि हर माह आपके द्वारा एक नियत धनराशि जमा यानी निवेश की जाती है। कुछ लोग सोचते हैं कि एसआईपी यानी सिप में दो अलग-अलग फंड होते हैं, एक एसआईपी के लिये और दूसरा म्यूचुअल फंड के लिये, जबकि ऐसा नहीं है।

SIP का फुल फॉर्म क्या है (Full Form of SIP in Hindi)

SIP का हिंदी फुल फॉर्म Systematic Investment Plan है। SIP को हिंदी में “व्यवस्थित निवेश योजना” कहते है।

Systematic Investment Plan (SIP) किसके लिये बेहतर है 

मध्यमवर्गीय निवेशकों के लिये जो एक निश्चित आय रखते हैं पर निवेश का पीछा करने में पूरी तरह सक्षम नहीं हैं, म्यूचुअल फंड में निवेश के लिये सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान ही बेहतर विकल्प होता है। उनके लिये भी, जो निवेश तो करना चाहते हैं पर बाजार की पर्याप्त समझ नहीं रखते, सिप एक अच्छा निवेश का ज़रिया है। इससे जानकारों की देखरेख में आपके ‘फंड’ का बेहतर मैनेजमेंट हो जाता है।

इससे यह भी सुनिश्चित हो जाता है कि बाजार में आने वाले फायदे के मौकों में कोई चूक न होगी। हालांकि म्यूचुअल फंड के तहक सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान को निवेश करने का सबसे फायदेमंद तरीका तो नहीं कह सकते, पर यह उन बहुसंख्यक लोगों के लिये सबसे बेहतर है जो नियमित आय कमाते हैं अथवा वेतनभोगी हैं।

इक्विटी मार्केट के लिये सिप के ज़रिये म्यूचुअल फंड में निवेश करना भी एक बेहतर आइडिया है। हालांकि इक्लिटी के शेयर बाजार में रिस्क अपेक्षाकृत अधिक है, पर ‘रिटर्न’ भी उसी अनुपात में बेहतर मिलता है। इसलिये अगर आप इक्विटी मार्केट में उतरना चाहते हैं तो म्यूचुअल फंड के तहत ‘एसआईपी’ यानी सिप एक अच्छा और अपेक्षाकृत सुरक्षित ऑप्शन साबित हो सकता है।

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SIP में Invest कैसे करें 

सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के तहत म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने के लिये सबसे पहले आपको केवाईसी(KYC) की औपचारिकतायें पूरी करनी होती हैं। जिसके लिये जरूरी कागज़ातों में पैन कार्ड, एड्रेस प्रूफ़, पासपोर्ट साइज फोटो और बैंक विवरण की जरूरत होगी। फिर आप किसी म्यूचुअल फंड की प्रामाणिक वेबसाइट पर जाकर ‘सिप’ के तहत निवेश कर सकते हैं।

म्यूचुअल फंड में ‘एसआईपी’ का महत्व : क्यों करें सिप में निवेश 

 कोरोनाकाल के बाद आजकल मंदी का असर दुनिया में हर ओर दिख रहा है। ऐसे में बचत का महत्व बढ़ जाता है। साथ ही, इस समय ऐसी जगह निवेश फायदेमंद साबित होगा जहां ‘रिस्क-फ़ैक्टर’ कम से कम हो, और बढ़ती मुद्रास्फ़ीति या महंगाई का आपके निवेश पर ज्यादा असर न आने पाये।

अगर आप एसआईपी के तहत लंबी अवधि का निवेश करते हैं तो निवेश संबंधी ये सहूलियतें सहज ही पा सकते हैं। इसमें दो राय नहीं कि लंबी अवधि के निवेश में रिस्क कम होता है। और अगर आप बेहतर रिटर्न पाने के लिये ल़ंबी अवधि का सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं, तो म्यूचुअल फंड के तहत सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी सिप से बेहतर कोई विकल्प नहीं।

इसलिये आज के वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सुरक्षित निवेश के लिये एसआईपी यानी सिप एक अच्छा विकल्प है। वस्तुतः अगर आपको म्यूचुअल फंड में निवेश करना है तो आजकल सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान सबसे मुफ़ीद है। हालांकि ‘रिटर्न’ तो हमेशा बाजार की चाल पर ही निर्भर करता है, पर सिप में लंबी अवधि का निवेश ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।

म्यूचुअल फंड्स में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के तहत लंबी अवधि का निवेश अमूमन इसलिये फायदेमंद साबित होता है क्योंकि लंबे समय में आपको शेयर/इक्विटी की सबसे ऊंची और निचली कीमतों के एक औसत रेट से मुनाफ़ा मिल जाता है। और इस तरह छोटी अवधि में होने वाले नुकसान समायोजित हो जाते हैं।

‘SIP’ में पैसे लगाने के लिये समय और धनराशि का चयन महत्वपूर्ण 

एसआईपी (SIP) में निवेश करते समय यह निर्णय लेना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है कि हमें किसी म्यूचुअल फंड में कब और कितना निवेश करना है। जैसे कि अगर आप सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान यानी सिप के तहत पांच सौ रूपये प्रतिमाह का प्लान करते हैं तो यह अमूमन नाकाफ़ी साबित होगी।

क्योंकि स्वाभाविक रूप से इससे आपको बेहद कम रिटर्न मिलेगा। फिर भी एसआईपी छोटे निवेशकों के लिये ‘बेस्ट ऑप्शन’ है। आम तौर पर आजकल सिप में शुरुआती समय कम से कम दो हजार रूपये प्रतिमाह निवेश करना हर तरह से मुफ़ीद माना जाता है।

बता दें कि सिप में एकमुश्त निवेश करने का विकल्प भी मौजूद है। शेयर बाजार के सूचकांक नीचे गिरने पर आप चाहें तो मुनाफ़ा कमाने के इस मौके का लाभ उठाते हुये अपने पहले से चल रहे सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी ‘एसआईपी’ में ज्यादा धनराशि का एकमुश्त निवेश भी कर सकते हैं। और इसके लिये आप वही एसआईपी पोर्टफ़ोलियो नंबर इस्तेमाल कर सकते हैं।

एसआईपी में निवेश के लिये रकम निश्चित हो जाने के बाद उचित समय व अवधि का निर्णय करना भी उतना ही जरूरी है।  जानकारों का मानना है कि सिप के अंतर्गत त्रैमासिक अथवा साप्ताहिक की बजाय मासिक आधार पर निवेश करना कहीं ज्यादा सहूलियत भरा होता है। इसमें यह बहुत महत्वपूर्ण नहीं होता कि माह के किस तारीख को आप एसआईपी के लिये पैसे डालते हैं। सो, यदि आप वेतनभोगी हैं तो अपनी तनख़्वाह के आसपास वाले दिनों में हर महीने इसे आसानी से नियमित जमा करते रह सकते हैं।

जानकारों के मुताबिक अगर आप किसी ‘लार्ज कैपिटल’ वाले म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना चाहते हैं तो कम से कम तीन वर्ष की अवधि के लिये निवेश करें। इसी तरह ‘मिडकैप’ सिप में पांच और ‘स्मॉलकैप’ में न्यूनतम 7-8 सालों के लिये इन्वेस्टमेंट करना सही और सुरक्षित माना जाता है।

एसआईपी में लंबी अवधि का निवेश करने से कुल मिलाकर ‘कंपाउंड गेन’ मिलता है, जिसमें इस दौरान बीच-बीच में हुई छोटी अवधि की हानियां लाभों से समायोजित हो जाती हैं। इसी तरह कभी-कभी ‘एक्सपर्ट्स’ लार्ज या स्मॉल कैप की बजाय ‘फ़्लेक्सीबल कैप’ में निवेश की सलाह देते हैं।

यहां हमारे मन में एक स्वाभाविक सवाल यह उठता है कि अगर एसआईपी में कभी हम समय पर नियत धनराशि जमा करने में असफल रहते हैं तो क्या होगा! असल में कानूनी तौर पर तो समय-समय पर एसआईपी की निर्धारित धनराशि जमा करना अनिवार्य होता है। पर आप चाहें तो बीच में ही कंपनी को पत्र देकर इसके लिये मना कर सकते हैं। अगर किसी महीने आपके खाते में पर्याप्त धन नहीं है तो एसआईपी अगले माह काटी जा सकती है, और बैंक इसका शुल्क लेते हैं।

सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (सिप) में पैसा लगाने के फायदे 

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के फायदे बहुआयामी हैं। सबसे पहले तो इससे खरीदे गये यूनिट्स यानी इकाइयों की लागत कम आती है। साथ ही, यहां निवेश क्रमशः कम होता जाता है। एसआईपी में आप अपनी सहज मासिक बचत से लंबी अवधि तक किये गये छोटे-छोटे निवेशों से आखिरकार आप एक बड़ा ‘रिटर्न’ पा सकते हैं।

इसके अलावा सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के तहत निवेश करने में फायदा ये है कि इसमें जोखिम कम होता है। सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स में आसानी के साथ ऑनलाइन निर्देशों का पालन करते हुये भी निवेश कर सकते हैं। और निश्चित तिथि पर खाते से धनराशि निकाल भी सकते हैं।

एसआईपी (SIP) पर लगने वाले टैक्स 

एसआईपी पर लगने वाला टैक्स मूलतः इस बात पर निर्भर करता है कि आपने इक्विटी फंड में निवेश किया है या कहीं और। फिर निश्चित दर के अनुसार टैक्स निर्धारित किया जाता है। बता दें कि ‘सिप’ की हर किश्त अपने आप में एक नया निवेश मानी जाती है।

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (सिप) में निवेश करने पर सालाना एक लाख तक की राशि पर आयकर में छूट मिलने का प्रावधान है। म्युचुअल फंड में निवेशकों को ‘रिटर्न’ के रूप में मिलने वाले पूंजीगत लाभ और लाभांश पर टैक्स अदा करना होता है। जिसकी दरें म्युचुअल फंड्स को बेचने की अवधि से तय होती हैं।

ध्यान रहे कि किसी निवेशक द्वारा अपनी ‘म्यूचुअल फंड यूनिट्स’ को बेचकर कमाये गये लाभ को पूंजीगत लाभ कहा जाता है। इसी तरह कोई कंपनी अपने मुनाफ़े में शेयरधारकों को जो हिस्सा देती है उसे लाभांश कहते हैं। एसआईपी में निवेशकों को उनकी यूनिट्स के आधार पर लाभांश का फायदा प्राप्त होता है।

एसआईपी में लाभांश पर टैक्स 

 2020 में पहली बार केंद्र सरकार ने बजट में लाभांश पर कर लगाने की घोषणा की। गौरतलब है कि इसके पहले लाभांश पर किसी तरह का कोई कर नहीं लगता था। 2020 से पहले कंपनियां इस मद में केवल ‘डिवीडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स’ या डीडीटी देती थीं। अब केंद्र के नये प्रावधानों के अनुसार निवेशकों के ‘इनकम-टैक्स स्लैब’ के मुताबिक लाभांश पर कर निर्धारित किया जाता है।

SIP में इक्विटीफंड पर टैक्स 

 वे म्यूचुअल फंड जो अपने पूरे पोर्टफ़ोलियो का कम से कम पैंसठ फ़ीसदी निवेश शेयर या इक्विटी मार्केट में करते हैं, ‘इक्विटी फंड’ कहलाते हैं। जब कोई इक्विटी फंड यूनिट साल भर के अंदर ही बेच दी जाती है तो यह ‘शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन’ कहलाता है। इस पर पंद्रह प्रतिशत टैक्स व चार प्रतिशत की दर से सेस भी लगता है। ऐसे ही, एक साल बाद बेची गई यूनिट्स पर हुये लाभ को ‘लाँग टर्म कैपिटल गेन’ कहते हैं।

सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी सिप के अंतर्गत लाँग टर्म कैपिटल गेन पर दस फ़ीसद कर लगता है, एवं इसमें चार फ़ीसदी सेस भी जुड़ता है। एसआईपी के तहत लाँग टर्म कैपिटल गेन पर लगने वाले टैक्स में ख़ास बात ये है कि यह टैक्स तभी लगता है जब एक वित्तीय वर्ष में आपने सिप के ज़रिये एक लाख रूपये या ज्यादा की कमाई कर ली हो।

(SIP) में निवेश करने पर डेट फंड पर टैक्स 

  इक्विटी फंड्स के उलट ‘डेट फंड’ उन म्युचुअल फंड्स को कहते हैं जो अपने कुल पोर्टफोलियो का 65 प्रतिशत से कम हिस्सा शेयर बाजार में लगाते हैं। इस पर कर की गणना निवेशकों के ‘इनकम-टैक्स स्लैब’ के अनुसार की जाती है। यहां तीन साल की समय सीमा से पहले बेची जाने वाली डेट फंड की यूनिट्स या इकाइयों पर होने वाला लाभ ‘शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन’ में आता है। और यदि आप यूनिट्स को तीन वर्ष रोकने के बाद बेचते हैं तो यह ‘लाँग टर्म गेन’ में आयेगा; और इसके लिये आपको 20% (बीस प्रतिशत) की दर से टैक्स और साथ में सेस वगैरह सरचार्ज जमा करना पड़ता है।

सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) में निवेश के जोखिम (रिस्क) और सावधानियां 

 आमतौर पर बहुसंख्यक निवेशकों की ये धारणा है कि सिप में निवेश उनके पैसे को ‘रिस्क-फ़्री’ कर देगा। हालांकि यह सही है कि आज नियमित आय वाले मध्यमवर्गीय लोगों के लिये निवेश के दूसरे तरीकों की अपेक्षा ‘सिप’ कहीं ज्यादा मुफ़ीद है, लेकिन इसमें भी रिस्क बिल्कुल ही नहीं ख़त्म हो जाता।

इसलिये एसआईपी में निवेश करने से पहले अपने आंख-कान खोलकर कुछ जरूरी चीजों की पड़ताल करनी अपरिहार्य है। इधर कुछेक बड़े शहरों में सिप में निवेश के लिये उत्सुकता और जागरूकता काफी बढ़ी है, लेकिन बहुसंख्यक भारतीय आबादी अब भी एसआईपी में निवेश के विकल्प से भी अनजान है। जबकि सिप में निवेश का तानाबाना आम भारतीयों को ख़्याल में रखते हुये ही बुना गया है।

सिप के तहत निवेश में 2019 के दौरान कुछ कमी दर्ज की गई। मई, 2019 में सिप में निवेश की दर घटकर बारह फीसदी के निम्नतम स्तर पर आ गई। असल में पहले के सालों में ज्यादा रिटर्न मिलने की वजह से ज्यादातर नये ‘सिप’ स्मॉल व मिड कैप में शुरू किये गये, जो उम्मीदों के मुताबिक लाभ न दे सके। ‘बीएसई’ के स्मॉल और मिडकैप का तत्कालीन रिटर्न तीन वर्षों से लगभग शून्य रहा।

सिप में कभी-कभी निवेशक लंबी अवधि के नज़रिये से पैसा लगाना शुरू करते हैं, पर दो-एक साल में यह क्रम तोड़ देते हैं। बाजार के जानकारों के मुताबिक यह कोई अच्छी रणनीति नहीं है। बाजार की कमजोरी के दौरान निवेश के बेहतर विकल्प मौजूद होते हैं, उस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहिये। असल में वही खरीदारी का सही अवसर होता है।

और सही बात तो ये है कि जैसे चढ़ते बाजार को देखकर उतावले होकर धड़ाधड़ खरीदारी उचित नहीं, वैसे ही बाजार में मंदी पर घबराहट में आकर यूनिट्स बेचते जाना भी ठीक नहीं। ध्यान रहे कि सिप के ज़रिये कितनी भी लंबी अवधि तक निवेश करते रहें, गलत नीतियों और निर्णयों के साथ आप नुकसान ही उठायेंगे।

हालांकि रिस्क और ‘प्रॉफ़िट’ का पुराना नाता है। बिना रिस्क के कोई काम नहीं होता और न ही कोई फायदा। फिर भी अगर जोखिम और मुनाफ़े के इस अनुपात को संतुलित करके देखा जाये तो आज भारत के खासतौर से वेतनभोगी मध्यवर्ग के लिये म्यूचुअल फंड के अंतर्गत ‘सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान’ में पैसा लगाना कहीं कम जोखिम भरा और एक बेहतर रिटर्न देने वाला निवेश है।

SIP के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न –

SIP शुरू करने के लिए क्या करना चाहिये?

अगर आप SIP शुरू करना चाहते है, तो इसके लिए Groww App पर अपना अकाउंट बनाकर किसी भी अच्छे Mutual Fund में SIP के माध्यम से इन्वेस्ट करना शुरू कर सकते है।

SIP पर कितना ब्याज मिलता है?

SIP इन्वेस्टमेंट लॉन्ग टर्म्स के लिए होता है, अगर आप एक अच्छा फंड्स चुनते है, तो आपको सालाना 12% तक का निश्चित रिटर्न मिल जाता है। क्योकिं इसमें इन्वेस्टर को मार्किट के रिस्क का सामना नहीं करना पड़ता है।

SIP कब लेना चाहिए?

अगर आपकी सैलरी हर महीने आती है, तो आप SIP शुरू कर सकते है। SIP का सही समय आपकी सैलरी के लगभग दो दिन बाद होना चाहिये। उदहारण के लिए : अगर आपकी सैलरी हर महीने की 5 तारीख को आती है, तो आपको अपनी SIP जमा करने की तारीख 7 रखनी चाहिये।

SIP का नुक्सान क्या है?

वैसे तो SIP में किसी तरह का कोई नुक्सान नहीं है। लेकिन अगर आप Short Terms के लिए SIP में इन्वेस्ट करते है, तो इसमें आपको उतना अच्छा रिटर्न देखने के लिए नहीं मिलता है। जितना रिटर्न आप आप सोच रहे है।

Note : यह लेख SIP Kya Hai in Hindi के बारे में था। जिसमे आपको Mutual Fund Me SIP Kya Hai और आप SIP द्वारा कैसे Invest कर सकते है। इससे जुड़ी सभी जानकारियां आपको दी गयी है। अगर आपका इस लेख से सम्बंधित कोई भी सवाल है, तो आप हमें कमेंट करके बता सकते है। अगर आपको यह लेख पसंद आया, तो कृपया इस लेख को अपने सभी दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें, धन्यवाद।

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