ब्रेस्ट कैंसर से बचने के लिए अब 40 की उम्र से ही शुरू कर दें ये काम, डॉक्टरों ने दे दी है चेताव


‘युनाइटेड स्टेट्स प्रिवेंटिव सर्विसेज टास्क फोर्स’ ने मंगलवार को एक ड्राफ्ट तैयार किया है. जिसमें उन्होंने ब्रेस्ट कैंसर को लेकर लेकर कुछ खास दिशा निर्देश जारी किए हैं. इसमें साफ किया गया कि महिलाओं को 40 से 50 साल की उम्र से हर दूसरे साल ब्रेस्ट कैंसर की जांच और स्क्रीनिंग के लिए जाना चाहिए. 2016 कि रिपोर्ट के मुताबिक 50 साल से कम उम्र कि महिलाएं को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है. इसलिए उन्हें समय-समय पर स्क्रीनिंग और डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है.

40 साल की उम्र से स्क्रीनिंग कराने से 19 प्रतिशत महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर से बचाया जा सकता है

टास्क फोर्स का कहना है कि 40 साल की उम्र में महिलाएं अगर स्क्रीनिंग कराएं तो 19 प्रतिशत लोगों की जान बचाई जा सकती है. स्पेशलिस्ट का कहना है कि यह दिशानिर्देश एक दिशा कि ओर है. लेकिन इन सब के बीच एक बात का खास ख्याल रखना चाहिए वह यह कि महिलाओं को हर साल या दो साल पर एक बार ब्रेस्ट स्क्रीनिंग की जांच करवानी चाहिए. वहीं एक दूसरे ग्रुप का कहना है कि 40 साल की उम्र से महिलाओं को मैमोग्राम शुरू कर देना चाहिए.

मैमोग्राम के बीच कैंसर बढ़ता है.’मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. मैक्सिन जोशेलसन के मुताबिक 40 साल की उम्र से जिन महिलाओं ने स्क्रीनिंग शुरू कर दी. उनके बीच ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम घटता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका में हर 30 प्रतिशत महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित होती हैं. साथ ही साथ यह भी अनुमान लगाया गया है कि 8 में से 1 महिला को ब्रेस्ट कैंसर है.  ब्रेस्ट कैंसर के हिसाब से 62 साल बड़ा जोखिम भरा रहता है. लेकिन यह अलग-अलग लोगों और नस्ल पर निर्भर करता है. 

गोरे लोगों के मुकाबले काले लोग कम उम्र में ब्रेस्ट कैंसर से हो सकते हैं पीड़ित 

ब्रेस्ट कैंसर के स्पेशलिस्ट ने इस कैंसर को लेकर एक अजीबोगरीब बात कही. उन्होंने कहा कि गोरी महिलाओं के मुकाबले  ब्लैक वुमन में कम उम्र में ही ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा रहता है. ब्लैक वुमन में ब्रेस्ट कैंसर से मरने की संभावना 40 प्रतिशत बढ़ जाती है. 

ब्लैक वुमन में 5 में से 1 महिला ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं

ब्लैक वुमन में 5 में से 1 महिला ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं. ब्लैक वुमन में ब्रेस्ट कैंसर का थोड़ा अलग हो जाता है. इन नस्ल के लोगों में एक प्रकार जो बढ़ता है और अधिक तेज़ी से फैलता है, जिसका इलाज करना मुश्किल होता है और स्तन कैंसर में आमतौर पर पाए जाने वाले तीन रिसेप्टर्स की कमी होती है जिसे डॉक्टर उपचार के लिए लक्षित करते हैं.’टफ्ट्स मेडिकल सेंटर’ में नैदानिक ​​निर्णय लेने के विभाजन के प्रमुख टास्क फोर्स के सदस्य और इंटर्निस्ट डॉ. जॉन वोंग ने यूएसए टुडे को बताया, टास्क फोर्स “स्क्रीनिंग और उपचार में स्वास्थ्य संबंधी असमानताओं को दूर करने के तरीके पर और अधिक रिसर्च करने के लिए कह रही है.

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण कुछ इस तरह हो सकते हैं

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मैमोग्राम से रेग्युलर जांच के बाद पता लगाया जा सकता है कि ब्रेस्ट कैंसर है या नहीं. हालांकि कुछ लोगों में शुरुआती लक्षण में हाथों के नीचे गांठ, निप्पल का रंग बदला हुआ, उल्टा निप्पल और दूसरे कई तरह के बदलाव दिखने को मिलते हैं. कई बार ऐसा होता है कि जिनके ब्रेस्ट कैंसर आखिरी स्टेज में है उन्हें ही इस बीमारी का पता चल पाता है. या कई लोगों को  दूसरे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं.

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