बस 400 मीटर लंबा, ये है दुनिया का सबसे छोटा एयरपोर्ट, जान जोखिम में डाल प्लेन उतारते हैं पायलट!


किसी भी एयरपोर्ट पर हवाई जहाज के उड़ान भरने से लेकर उसे नीचे उतारने तक रनवे की एक सीमा होती है. उसी के मुताबिक, किसी भी एयरपोर्ट का निर्माण किया जाता है. सुरक्षा के लिहाज से इसका ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है. दुनियाभर के ज्यादातर एयरपोर्ट का रनवे कम से कम 1.8 किलोमीटर से लेकर 4 किलोमीटर तक होता है. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे एयरपोर्ट के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके रनवे की लंबाई महज 400 मीटर ही है. यहां एक छोटी सी चूक का मतलब बड़ा हादसा. प्लेन सीधे समुद्र में समा जाएगी.

हम जिस एयरपोर्ट की बात कर रहे हैं, उसका नाम जुआनचो ई. यरौस्किन हवाई अड्डा (Juancho e Yrausquin Airport) है, जो नीदरलैंड के सबा आइलैंड (Saba Island) पर बना है. इस कमर्सियल एयरपोर्ट का रनवे न सिर्फ छोटा है, बल्कि समुद्र और चट्टानों के किनारे बना है. ऐसे में एक छोटी सी गलती की वजह से प्लेन के समुद्र में गिरने का जोखिम बना रहता है. कमजोर दिलवाले पायलट यहां पर अपने प्लेन को लैंड नहीं करवा सकते, क्योंकि यहां लैंडिंग के लिए केवल बहादुरी ही नहीं, बल्कि कौशल की भी आवश्यकता होती है. इसे दुनिया में सबसे डरावनी लैंडिंग माना जाता है.

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मात्र 400 मीटर लंबा है रनवे. (Photo- Fyodor Borisov)

ये एयरपोर्ट भले ही कमर्सियल हो, लेकिन यात्री विमान भी यहां उतारे जाते हैं. प्लेन से आए पैसेंजर्स को इस आइलैंड पर अक्सर “मैं सबा लैंडिंग से बच गया” वाला शर्ट पहने देखा जा सकता है. बता दें कि इस एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित पायलटों के एक समूह की आवश्यकता होती है. हालांकि, हवाई अड्डे से उड़ान भरना भी उतना ही रोमांचकारी है, जितना प्लेन को उतारना, क्योंकि जब विमान चट्टान से नीचे की ओर तेजी से बढ़ता है तो यात्री अपनी सांसें रोक लेते हैं. जैसे ही विमान चट्टान और रनवे के अंत तक पहुंचता है और चंद सेकंड में हवा में उड़ान भरता है, तभी पैसेंजर्स राहत की सांस ले पाते हैं.

हालांकि, इस एयरपोर्ट पर प्लेन को उतारना किसी फिल्मी स्टंट से कम नहीं है. ऐसा केवल एड्रेनालाईन-जंकी द्वारा ही किया जा सकता है और अनुभवी एविएटर कैप्टन रोजर हॉज उनमें से एक हैं. एड्रेनालाईन से तात्पर्य, तनाव में शारीरिक स्थिति को कंट्रोल करने वाले हार्मोन से है. कैप्टन रोजर हॉज ने सीएनएन को बताया, “एक पायलट के रूप में मुझे सबा में जाना बहुत पसंद है, क्योंकि वहां जाने के बाद ही आप अपने अनुभव को पूरा इस्तेमाल में लाते हैं. ऐसा करते हुए आपको यात्रियों और जमीन पर मौजूद लोगों द्वारा देखा जा रहा है, लेकिन आपको बस उस मशीन को उड़ाना है.”

बता दें कि इस छोटे रनवे पर उतरने वाले पहले व्यक्ति एक महत्वाकांक्षी एविएटर रेमी डी हेनेन थे. उन्होंने 9 फरवरी, 1959 को सबा द्वीप पर पहली बार लैंडिंग की. इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए पूरा शहर मौजूद था. इसके बाद से लगातार प्लेन लैंड करवाए जाने लगे. इस छोटे से आइलैंड की कुल आबादी 1990 है, जबकि हर साल यहां पर 9 हजार से अधिक टूरिस्ट आते हैं. सबा के लिए ये एयरपोर्ट लाइफलाइन है, क्योंकि इसी के जरिए स्थानीय लोगों को चिकित्सा उपचार के लिए ले जाता है और दूसरी तरफ से आगंतुकों को लाया जाता है.

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