मुगलकाल में बनी कंपनी, जिन्ना की बेटी को बनाया घर की बहू, वाडिया समूह की पूरी कहानी


नई दिल्ली: गो फर्स्ट एयरलाइंस (Go First Airlines) ने एनसीएलटी (NCLT) में वॉलंटरी इनसॉल्वेंसी प्रॉसीडिंग (Voluntary insolvancy proceedings) के लिए आवेदन किया है। कंपनी दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गई है। हालात ऐसे बने कि एयरलाइन ने रातों-रात विमान सेवा को बंद करने का फैसला ले लिया। अगले तीन दिनों दिनों तक गो फर्स्ट एयरलाइंस की सारी फ्लाइटें कैंसिल कर दी गई है। 3 से 5 मई 2023 तक गो फर्स्ट की विवाम सेवा ठप है। हैरानी की बात है कि देश की सबसे पुरानी कंपनी वाडिया समूह (Wadia Group) जिसकी दौलत अरबों-खरबों में है उसकी कंपनी पैसों की तंगी के चलते डूबने के कगार पर पहुंच गई है। आज इसी वाडिया समूह की कहानी जानते हैं। इसकी कहानी जानने के लिए भी आपको 300 साल पीछे जाना होगा।

​देश की सबसे पुरानी कंपनी

​देश की सबसे पुरानी कंपनी

वाडिया समूह (Wadia Group) की शुरुआत मुगलकाल में हुई थी। 1707 में औरंगजेब की मौत के बाद साल 1736 में गुजरात के सूरत के रहने वाले वाडिया परिवार ने सबसे पहले कंपनी कॉन्सेप्ट की शुरुआत की। उस वक्त वो सामानों से आदान-प्रदान करते थे। कारोबार समंदर पार भी होता था। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को जहाज बनाने के लिए लोग चाहिए थे। वाडिया समूह ने यहीं से अपने कारोबार को बढ़ाना शुरू किया। उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ काम करना शुरू किया। वो ब्रिटिश ईस्ट इंडिया के लिए पानी के जहाजों का निर्माण करते थे।

​नोवजी नुसेरवानजी वाडिया देश के पहले उद्योगपति

​नोवजी नुसेरवानजी वाडिया देश के पहले उद्योगपति

वाडिया परिवार के मुखिया नोवजी नुसेरवानजी वाडिया अंग्रेजों के लिए जहाज बनाने का काम करते थे। नुसेरवानजी वाडिया देश के पहले उद्योगपति थे। उन्होंने कंपनी कॉन्सेप्ट को समझा। अपने भीतर लोगों की बहाली की। जहां वस्तुओं के लेन-देन से कारोबार हो रहा था, वहां वाडिया ने कंपनी का कॉन्सेप्ट शुरू कर दिया। ये सब उस वक्त लोगों के लिए काफी नया था। कारोबार बढ़ता रहा। कंपनी सूरत से निकलकर मुंबई पहुंच गई। नोवजी नुसेरवानजी वाडिया ने मुंबई में अपनी कंपनी खोल ली। काम बढ़ रहा था। उन्हें ब्रिटिश ईस्ट इंडिया के लिए डॉक्स और शिप बनाने के आर्डर मिल रहे थे। साल 1840 तक वाडिया ग्रुप ने अंग्रेजों के लिए 100 से अधिक जहाज तैयार कर दिए। साल 1863 में वाडिया समूह ने द बांबे बर्मा ट्रेडिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड बनाई। ये देश की पहली पब्लिक ट्रेडिंग कंपनी थी। साल 1879 में बांबे डाइंग , साल 1918 में ब्रिटेनिया की शुरुआत की।

​जिन्ना की बेटी को बनाया घर की बहू

​जिन्ना की बेटी को बनाया घर की बहू

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की बेटी डिना वाडिया परिवार के घर की बहू बनीं। अपने पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर उन्होंने भारतीय पारसी परिवार में शादी की। साल 1936 में न्यूयार्क में डीना की मुलाकात नेविली वा‍डिया से हुई थी। नेविली पारसी परिवार से थे और डीना मुस्लिम, लेकिन दोनों एक दूसरे को पंसद करने लगे। पसंद प्यार में बदल गया और डीना ने अपने पिता का खिलाफ जाकर नेविली वाडिया से की। वाडिया बड़े कारोबारी थे, लेकिन उस माहौल में ढलने में डीना को बहुत वक्त नहीं लगा। डीना और नेविली वाडिया के बेटे नुस्ली वाडिया हैं। नुस्ली वाडिया ने मॉरीन वाडिया से शादी की। दोनों की दो संतानें नेस वाडिया और जहांगीर वाडिया हैं।

​वाडिया समूह की कमान

​वाडिया समूह की कमान

नुस्ली वाडिया वाडिया समूह के चैयरमैन हैं। एफएमसीजी (FMCG), टेक्सटाइल (Textile), एयरलाइंस (Airlines),टेक कंपनी समेत कई छोटी-बड़ी कंपनियां वाडिया समूह में शामिल है। वाडिया ग्रुप की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक गो फर्स्ट (Go First), बॉम्बे डाइंग (Bombay Dying), ब्रिटानिया (Britannia), बॉम्बे रियल्टी (Bombay Realty), वाडिया टेक्नो इंजीनियरिंग सर्विसेज (Wadia Techno-Engineering Services Ltd), बॉम्बे बरम्हा (Bombay Burmah), नेशनल पैराऑक्साइड (National Peroxide), डेंटल प्रोडक्ट्स, इंस्ट्रूमेंट ऑर्थोपेडीज कंपनियां शामिल वाडिया समूह का हिस्सा है।

​कितनी है दौलत

​कितनी है दौलत

अलग-अलग सेक्टर में फैले वाडिया समूह की कुल संपत्ति करीब 4.1 अरब डॉलर यानी 330 अरब रुपये की है। नेस और जहांगीर वाडिया कारोबार में अहम हिस्सेदारी रखते हैं। नेस वाडिया बॉम्बे बर्मा ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के एमडी हैं तो वहीं गो फर्स्ट की जिम्मेदारी जहांगीर वाडिया देख रहे हैं। ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज में नेस की मेजर हिस्सेदारी है। वाडिया समूह ने गो एयरलाइंस का नाम बदलकर गो फर्स्ट किया था। आज ये एयरलाइंस डूबने के कगार पर पहुंच चुकी है।



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