22 साल से फरार सिमी आतंकी हनीफ शेख गिरफ्तार: दिल्ली पुलिस ने भुसावल से पकड़ा; पहचान छिपाकर उर्दू स्कूल में टीचर बन गया था


नई दिल्ली9 दिन पहले

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हनीफ शेख को 2002 को लोकल अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया था। - Dainik Bhaskar

हनीफ शेख को 2002 को लोकल अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया था।

स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) का आतंकी हनीफ शेख को 22 साल बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 47 साल का हनीफ कई युवाओं को आतंकी ट्रेनिंग देता था और प्रतिबंधित संगठन की मैगजीन का एडिटर भी था।

पुलिस ने हनीफ शेख को 2002 में भगोड़ा घोषित किया गया था हनीफ पिछले 22 साल से फरार था। उसे 22 फरवरी को महाराष्ट्र के भुसावल से पकड़ा गया है। जहां हनीफ पहचान छिपाकर रहता था और एक उर्दू स्कूल में टीचर बन गया था।

मैगजीन में छपा नाम ही इकलौता सबूत था
DCP आलोक कुमार ने बताया कि हनीफ सबसे कुख्यात और वांटेड सिमी आतंकवादी था। उसने देशभर में सिमी की कई वारदातों में भूमिका निभाई थी। पुलिस ने बताया कि हनीफ ने जिस सिमी मैगजीन का संपादन किया था, उसमें उसका नाम हनीफ हुडाई छपा था। यही पुलिस के पास इकलौता सुराग था, जिसके कारण उसका पता लगाना मुश्किल हो गया था।

2001 में दिल्ली की न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ देशद्रोह और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया था। लोकल अदालत ने 2002 में उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था।

हनीफ शेख भुसावल में उर्दू टीचर बनकर छिपा था।

हनीफ शेख भुसावल में उर्दू टीचर बनकर छिपा था।

ऐसे पकड़ा गया SIMI का ऑपरेटिव
स्पेशल सेल की एक टीम को राज्यों में फरार SIMI कैडर, समर्थकों और स्लीपर सेल के बारे में डेटा, जानकारी और बाकी डिजिटल फुटप्रिंट इकट्ठा करने का काम सौंपा गया। टीम ने देश भर के कई हिस्सों से जानकारी इकट्‌ठा की। इसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को हनीफ तक पहुंचने में मदद मिली। पुलिस ने एक टीम बनाई जिसने हनीफ को पकड़ने जाल बिछाया।

22 फरवरी को दोपहर करीब 2.50 बजे मोहम्मदुद्दीन नगर से खड़का रोड की ओर जा रहे एक व्यक्ति की पहचान हनीफ के रूप में हुई। जैसे ही टीम के सदस्यों ने उसे घेरना शुरू किया, हनीफ भागने लगा, लेकिन हाथापाई के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

हनीफ वहादत-ए-इस्लाम के थिंक टैंक का अहम सदस्य था
सिमी से जुड़ने के बाद हनीफ कट्टरपंथी बन गया था। फिर वह उसके वीकली इवेंट्स में जाने लगा और दूसरे युवाओं को कट्टरपंथी बनाने लगा। हनीफ को 2001 में सिमी की मैगजीन के उर्दू एडिशन का एडिटर बना दिया गया।

हनीफ वहादत-ए-इस्लाम के थिंक टैंक सदस्यों में से एक था और उसने महाराष्ट्र और आसपास के राज्यों से संगठन के लिए टेरर फंडिंग जुटाता था। वह दान की आड़ में धन इकट्ठा करता था। 2001 में दिल्ली से भागने के बाद हनीफ जलगांव और उसके बाद महाराष्ट्र के भुसावल चला गया।

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