IAS Success Story: रेहड़ी पर मिठाई बेचते थे पिता, बेटा सौरभ पहले प्रयास में बना IAS


IAS Success Story: हरियाणा के रहने वाले सौरभ स्वामी  के पिता अशोक स्वामी रेहड़ी पर मिठाई बेचा करते थे। उन्होंने अपने पिता के जुझारूपन से प्रेरणा ली। स्कूल के बाद इंजीनियरिंग की और इसके बाद सिविल सेवाओं की तैयारी कर पहले प्रयास में ही IAS बन गए। 

Kishan Kumar
आईएएस सौरभ स्वामी

आईएएस सौरभ स्वामी

IAS Success Story: UPSC सिविल सेवा देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में शुमार है। इस परीक्षा के लिए हर साल लाखों युवा तैयारी करते हैं, लेकिन सफलता केवल उन लोगों को मिलती है, जो गंभीरतापूर्वक इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। यही वजह है कि इस परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले युवाओं की संख्या लाखों में रहती है, जबकि इस परीक्षा के मेंस में केवल कुछ हजार छात्र ही पहुंच पाते हैं। इस लेख के माध्यम से हम आपको हरियाणा के रहने वाले सौरभ स्वामी की कहानी बताने जा रहे हैं, जिनके पिता हरियाणा में रेहड़ी पर मिठाई बेचा करते थे। सौरभ ने अपनी स्कूली पढ़ाई के बाद इंजीनियरिंग की और इसके बाद इंजीनियर के रूप में काम किया। वहीं, सिविल सेवाओं की तैयारी की और अपने पहले प्रयास में ही वह इस परीक्षा को पास कर आईएएस बनने में सफल रहे। 

 

सौरभ स्वामी का परिचय

सौरभ स्वामी मूलरूप से हरियाणा के चरखी दादरी के रहने वाले हैं। उन्होने अपनी स्कूली शिक्षा चरखी दादरी से पूरी की। इसके बाद दिल्ली के भारतीय विद्यापीठ से इंजीनियरिंग की।

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बंगलुरू में लगी नौकरी 

इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक उपक्रम कंपनियों में जाने के लिए तैयारी की थी। इसके बाद उन्हें बंगलुरू स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स में नौकरी मिल गई। यहां वह एक वरिष्ठ पर पद पर रहे। 

 

SAURABH SWAMI IAS

पिता रेहड़ी पर बेचते थे मिठाई

सौरभ के पिता अशोक स्वामी हरियाणा के चरखी दादरी में रोहतक चौक पर मिठाई का ठेला लगाते थे। वहीं, उनकी माता ने बीएड किया है। सौरभ अपने पिता की मेहनत से काफी प्रेरित थे। ऐसे में उन्होंने तय कर लिया था कि जीवन में कुछ बड़ा करना है। 

 

सिविल सेवाओं की शुरू की तैयारी 

सौरभ स्वामी ने इंजीनियरिंग के बाद सिविल सेवाओं की तैयारी शुरू कर दी थी। वह इसके लिए नोट्स बनाने के साथ-साथ स्टैंडर्ड किताबों का भी अध्ययन किया करते थे। 

 

पहले प्रयास में बने IAS

सौरभ स्वामी ने अपना पहला प्रयास किया और वह प्रीलिम्स की परीक्षा को पास करने में सफल रहे। वहीं, इसके बाद वह मेंस में पहुंचे और मेंस के सभी विषयों की परीक्षा को पास किया। सौरभ ने अपने वैकल्पिक विषय के रूप में भूगोल को रखा था। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था कि उनके पास समय कम था। ऐसे में इस विषय को लेकर उन्हें थोड़ी बहुत जानकारी पहले से थी, जिससे इस विषय को तैयार करने में मदद मिली। वह मेंस की परीक्षा को भी पास करने में सफल रहे और इंटरव्यू तक पहुंचे। इंटरव्यू में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया और 2015 की परीक्षा में 149वां रैंक प्राप्त किया और सफलता हासिल की। 

 

राजस्थान में हैं तैनात

सौरभ स्वामी को राजस्थान कैडर मिला है। वर्तमान में वह राजस्थान में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। सौरभ स्वामी की अभ्यर्थियों को सलाह है कि जो भी अभ्यर्थी इस परीक्षा की तैयारी कर रहा है, वह अपने साथ प्लान बी भी जरूर रखें। मेहनत करते रहे और क्योंकि यही एक रास्ता है, जो आपको आपकी मंजिल तक पहुंचा सकता है। 

 

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