प्राण प्रतिष्ठा पर भड़के अनुराग कश्यप, बोले- राम मंदिर कभी था ही नहीं, वाराणसी का होकर नास्तिक हूं क्योंकि…


फिल्ममेकर अनुराग कश्यप अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। अब एक इवेंट में वह राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम पर बोले। उन्होंने कहा कि उन्हें यह सब विज्ञापन जैसा लगता है। अनुराग बोले कि जब इंसान के पास कुछ नहीं बचता तो वह धर्म पर आ जाता है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम नहीं बल्कि राम लला का मंदिर है, लोगों को फर्क नहीं पता।

देखा है धर्म का धंधा
अनुराग कश्यप को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन दिखावा लगा। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘कलकत्ता में हुए एक इवेंट में उन्होंने इस पर अपने विचार रखे। अनुराग बोले, 22 जनवरी को जो भी हुआ वह सिर्फ विज्ञापन था। मैं इसको ऐसे ही देखता हूं। वैसा ही ऐडवर्टीजमेंट जैसा कि खबरों के बीच में चलता है। यह 24 घंटे का ऐड था। मेरे नास्तिक होने का बड़ा कारण यह है कि मैं वाराणसी में पैदा हुआ। मैंने धर्म के धंधे को बहुत पास से देखा है।’

यह कभी राम मंदिर नहीं था
अनुराग बोले, ‘आप इसे राम मंदिर कहते हैं, यह कभी राम मंदिर नहीं था। यह लला का मंदिर था और पूरा देश इसमें अंतर नहीं बता सकता। किसी ने कहा है दुष्टों का धर्म ही आखिरी सहारा है। जब आपके पास कुछ नहीं बचता तो धर्म पर आ जाते हो। मैंने खुद को हमेशा नास्तिक कहा क्योंकि मैंने बड़े होते वक्त देखा है, कैसे निराश लोग रक्षा के लिए मंदिर जाते हैं जैसे वहां कोई बटन हो जिसे दबाकर वे सारी परेशानियां दूर कर लेंगे। क्या वजह है कि अब आंदोलन नहीं होते? लोग दिखने से डरते हैं।’

कंट्रोल करने वाले 4 कदम आगे
अनुराग ने कहा कि जिस तरह से हम लड़ रहे हैं उसका तरीका बदलना चाहिए। बोले कि सूचनाएं एल्गोरिदम से बदली जा रही हैं। लोगों को फोन पर वही मिलता है जो वे सुनना चाहते हैं और जिनके कंट्रोल में ये सब है वे हमसे चार कदम आगे हैं।

फोन फेंकने से आएगा बदलाव
अनुराग बोले, उनकी टेक्नॉलजी कहीं ज्यादा अडवांस है, वे बहुत स्मार्ट हैं, उनमें समझ है। हम सब अभी भी इमोशनल फूल हैं। अनुराग ने कहा कि क्रांति तभी संभव है जब लोग अपने फोन फेंक दें। जैसे स्वदेशी आंदोलन में विदेशी कपड़े जलाए गए थे। उन्होंने कहा कि लोग पोस्टर फाड़ने में ऊर्जा खर्च कर रहे हैं



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