नई दिल्ली: देश में जल्दी ही गेहूं और आटे की कीमत में में कमी आ सकती है। आटा मिलों के शीर्ष संगठन ने 30 लाख टन गेहूं को खुले बाजार में बेचने के सरकार के फैसले की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे गेहूं और आटे की कीमत में पांच से छह रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट आएगी। गेहूं और गेहूं के आटे की बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने अपने बफर स्टॉक से 30 लाख टन गेहूं को खुले बाजार में बेचने की घोषणा की है। पिछले साल गेहूं की कीमत में 37 फीसदी तेजी आई थी और इस साल अब तक इसमें सात फीसदी उछाल आ चुकी है। पिछले साल गर्मी बढ़ने के कारण गेहूं का उत्पादन प्रभावित हुआ था। साथ ही यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेहूं की कीमत में तेजी आई है।
सरकार के मुताबिक भारतीय खाद्य निगम (FCI) अगले दो महीनों में विभिन्न माध्यमों से खुले बाजार में गेहूं की बिक्री करेगा। जहां गेहूं आटा मिल मालिकों जैसे थोक व्यापारियों को ई-नीलामी के माध्यम से बेचा जाएगा वहीं गेहूं पीसकर आटा बनाने और उसे जनता तक 29.50 रुपये के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में पहुंचाने के लिए एफसीआई गेहूं को सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां/सहकारिता/संघ, केंद्रीय भंडार/एनसीसीएफ/नेफेड को 23.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचेगा।

Wheat Price: गेहूं की कीमत में जल्दी आ सकती है गिरावट, जानिए क्या है सरकार का प्लान
कितनी है गेहूं और आटे की कीमत
रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (RFMFI) के अध्यक्ष प्रमोद कुमार ने कहा, ‘हम सरकार के कदम का स्वागत करते हैं। यह फैसला एक महीने पहले ही ले लेना चाहिए था। यह सही कदम है। थोक और खुदरा कीमतें जल्द ही पांच-छह रुपये प्रति किलोग्राम तक कम हो जाएंगीं।’ सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख शहरों में गेहूं की औसत कीमत बुधवार को 33.43 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जबकि पिछले साल इस समय 28.24 रुपये प्रति किलोग्राम थी। गेहूं के आटा की औसत कीमतें 37.95 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गईं, जो पिछले साल इसी समय 31.41 रुपये प्रति किलोग्राम थी।