इंडस्ट्री में रची जानी वाली साजिशों का पर्दाफाश करने में कामयाब हुए करण जौहर? पढ़ें शोटाइम का रिव्यू

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वेब सीरीज: शोटाइम

कलाकार: इमरान हाशमी, महिमा मकवाना, मौनी रॉय, राजीव खंडेलवाल, श्रिया सरन, विशाल वशिष्ठ, विजय राज, नसीरुद्दीन शाह

निर्देशक: अर्चित कुमार

ओटीटी प्लेटफॉर्म: डिज्नी प्लस हॉटस्टार

OTT Web Series: नेपोटिज्म पर बनी वेब सीरीज ‘शोटाइम’ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम कर रही है। दिलचस्प बात तो ये है कि नेपोटिज्म को बढ़ावा देने के लिए ट्रोल होने वाले करण जौहर ने ही यह वेब सीरीज बनाई है। जी हां, उनके प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले ही यह वेब सीरीज तैयार हुई है। करण ने इस वेब सीरीज में सिर्फ नेपोटिज्म को ही नहीं बल्कि सेलेब्स की लाइफस्टाइल, बॉक्स ऑफिस नंबर और पर्दे के पीछे होने वाली गंदी राजनीति को भी हाइलाइट करने की कोशिश की है। अब सवाल यह उठता है कि क्या वह बॉलीवुड में खेले जाने वाले इस गंदे खेल को सही ढंग से पेश करने में कामयाब हो पाए हैं? पढ़िए हमारा रिव्यू।  

कुछ ऐसी है वेब सीरीज की कहानी

फिल्म सम्राट विक्टर खन्ना (नसीरुद्दीन शाह), जिन्हें “गॉडफादर ऑफ रोमांस” कहा जाता है, अपने घमंडी बेटे रघु खन्ना (इमरान हाशमी) से परेशान रहते हैं। जहां विक्टर खन्ना की फिल्मों में कहानी पर जोर दिया जाता था, वहीं रघु कंटेंट की बजाए बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर जोर देता है। ऐसे में अपने प्रोडक्शन हाउस की इमेज बचाने के लिए विक्टर खन्ना, युवा पत्रकार महिका नंदी (महिमा मकवाना) के नाम पर अपना प्रोडक्शन हाउस कर देता है। महिका विक्टर स्टूडियो की भाग-दौड़ संभालती है और रघु अपना खुदका स्टूडियो शुरू करता है। इसके बाद कहानी में नए-नए किरदार आते-जाते हैं और बाहर से खूबसूरत दिखने वाली इस दुनिया के असली कारनामे सामने आने लगते हैं।

कमाल के डायलॉग

‘2 घंटे फिल्म देखो और खिसको’, ‘फिल्में पैसों के लिए ही बनती हैं’, ‘थिएटर में मेरे फैंस तुम्हारी फिल्म की कहानी देखने आएंगे या मेरे चेहरा’…वेब सीरीज में ऐसे ही कई सारे मजेदार डायलॉग्स हैं। ये सिर्फ डायलॉग्स नहीं हैं, ये हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की कड़वी सच्चाई है। इन संवादों के जरिए ये दिखाने की कोशिश की गई है कि कैसे निर्माता अच्छी कहानी वाली फिल्में बनाने की बजाए पैसे कमाने वाली फिल्में बनाते हैं। एक सिनेप्रेमी के रूप में हम ने पिछले कुछ सालों में ऐसी कई सारी फिल्में देखी हैं जिनकी कहानी में कोई दम नहीं था, लेकिन बॉक्स ऑफिस के आंकड़े आसमान छू रहे थे इसलिए ये डायलॉग्स हमें सीरीज से जोड़े रखने का काम करती हैं।

एक्टिंग में कौन आगे कौन पीछे?

फिल्म इंडस्ट्री की साजिशों और सियासतों को दिखाने वाली इस वेब सीरीज में महिमा मकवाना और राजीव खंडेलवाल ने कमाल का काम किया है। दोनों आउटसाइडर्स ने नेपोटिज्म पर बनी इस वेब सीरीज में अपनी पूरी जान फूंक दी है। इमरान हाशमी ने भी ठीक-ठाक काम किया है। हालांकि मौनी रॉय, श्रिया सरन, विजय राज और नसीरुद्दीन शाह उतना कमाल नहीं दिखा पाए। विजय राज और नसीरुद्दीन शाह उम्दा कलाकार हैं, लेकिन इस वेब सीरीज में अपनी छाप छोड़ पाने में नाकामयाब रहे।

कहानी में नहीं है दम

टॉपिक अच्छा है, करण जौहर की अपनी छवि सुधारने की कोशिश अच्छी है, कलाकार अच्छे हैं और डायलॉग्स भी अच्छे हैं लेकिन…कहानी अच्छी नहीं है। बॉलीवुड में होने वाली साजिशों का पर्दाफाश करने की कोशिश में लेखक खुद ही गुम हो गए। सारे बड़े-बड़े कांड को वेब सीरीज में लेने के चक्कर में किसी भी एक कांड को सही तरीके से पेश नहीं कर पाए। 

देखें या नहीं?

फिल्म देखने के लिए पैसा खर्च करने वाले हर एक शख्स को ये वेब सीरीज देखनी चाहिए। उन्हें ऐसा अपना मनोरंजन करने के लिए नहीं बल्कि एक फिल्म बनाने के पीछे या यूं कहें आपकी जेभ से पैसे निकलवाने के लिए क्या-क्या खेल चलता है, वो जानने के लिए करना चाहिए।



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