कोख में पल रहे बच्चे की ‘हार्ट सर्जरी’! जानें ’90 सेकंड’ में कैसे दिया गया इस ऑपरेशन को अंजाम?

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किसी ने सच कहा है कि डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं. तभी तो वो ऐसे-ऐसे कारनामे कर जाते हैं, जिनपर यकीन करना कई बार मुश्किल हो जाता है. अब दिल्ली एम्स के डॉक्टरों को ही देख लीजिए, जिन्होंने एक महिला की कोख में पहले बच्चे के दिल का ऑपरेशन कर डाला. किसी को इस अनोखे मामले पर यकीन नहीं हो रहा. हालांकि यह कोई काल्पनिक किस्सा नहीं है, बल्कि सच में दिल्ली AIIMS के डॉक्टरों ने यह अद्भुत और कठिन काम कर दिखाया है, जिसकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तारीफ की है.

दरअसल, एक 28 साल की गर्भवती महिला को दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था. एम्स में भर्ती होने के बाद डॉक्टरों ने महिला और उसके पति को बच्चे की दिल की स्थिति के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि बच्चे का एक वाल्व बंद है. जिसकी वजह से दिल में खून के बहाव में दिक्कत पैदा हो रही है. खून का बहाव कम होने से बच्चे में दिल के विकास से जुड़ी समस्या उभर सकती है यानी अगर बच्चे का ऑपरेशन नहीं किया जाता तो पैदा होने के बाद उसे दिल की गंभीर बीमारी हो सकती थी. 

90 सेकंड में जीत ली ‘जंग’

महिला का पहले ही तीन बार मिसकैरेज हो चुका था. इसलिए डॉक्टरों ने इस बच्चे से जुड़े सभी खतरों के बारे में दंपति को पहले ही सूचित कर दिया. हालांकि फिर भी दंपति ने ऑपरेशन के लिए तुरंत हामी भर दी, क्योंकि वे बच्चे को दोबारा खोना नहीं चाहते थे. जिसके बाद डॉक्टर ने बच्चे के हार्ट के ऑपरेशन का प्रोसीजर शुरू किया. डॉक्टरों ने कोख में पल रहे बच्चे के अंगूर जितने छोटे दिल को ठीक करने के लिए ‘बैलून डाइलेशन सर्जरी’ की और महज़ 90 सेकंड में ही अपना मकसद पूरा कर डाला. इस सर्जरी के दौरान उन्होंने बच्चे के दिल का जो वाल्व बंद था, उसे वापस खोल दिया. 
 
इस ऑपरेशन के बाद अब बच्चे का दिल पहले से बेहतर विकसित होगा और उसे दिल की बीमारी का खतरा भी कम रहेगा. इस सर्जरी को बहुत दुर्लभ माना जा रहा है, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी बच्चे की जान ले सकती थी. यही वजह है कि ‘बैलून डाइलेशन सर्जरी’ को बहुत संजीदगी से अंजाम दिया गया. इस ऑपरेशन के बाद मां और बच्चा दोनों ठीक हैं. AIIMS के डॉक्टर अब बच्चे के हार्ट चैम्बर्स की ग्रोथ की निगरानी कर रही है. डॉक्टरों की टीम ने बताया कि बच्चे में दिल की बीमारी से जुड़े कुछ खतरों का मां की कोख में ही इलाज किया जा सकता है. ऐसा करने से जन्म के बाद बच्चे में पैदा वाला जोखिम कम हो जाता है.

‘बैलून डायलेशन प्रॉसिजर’ क्या है?

बैलून डायलेशन सर्जरी तब की जाती है, जब दिल के वॉल्व में किसी वजह से बाधा पैदा हो जाती है और वॉल्व क्लोज़ हो जाता है, जिससे ब्लड फ्लो में मुश्किलें पैदा होती हैं. यह सर्जरी अल्ट्रासाउंड गाइडेंस में किया गया था. इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए डॉक्टरों ने एक सुई मां की कोख के जरिये बच्चे के दिल में डाली थी. इसके बाद बैलून कैथेटर की मदद से बच्चे के वॉल्व में आई बाधा को दूर किया गया यानी क्लोज़ वॉल्व को खोला गया, ताकि ब्लड फ्लो बेहतर हो सके. डॉक्टर ने बताया कि उम्मीद है कि सर्जरी के बाद बच्चे का दिल अच्छी तरह से ग्रोथ कर पाएगा और जन्म के वक्त दिल की बीमारी का जोखिम भी कम रहेगा. 

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